वृक्षासन का अर्थ – विधि, लाभ और सावधानियां

वृक्षासन का नामकरण –

इस आसन में शरीर की आकृति वृक्ष के समान होने के कारण इसे वृक्षासन कहते है।

वृक्षासन की विधि –

इस आसन में हम खड़े होकर ऑखों की सीधी में किसी बिन्दु पर दृष्टि को स्थित करते हैं, दाहिने पैर को मोड़कर उसके पंजे को अर्ध पद्मासन की स्थिति में बायीं जाँघ पर रख लेना है ओर एक वृक्ष की भाँति स्थिर अवस्था में खड़े होना है। हाथों को प्रणाम की मुद्रा में छाती से लगा लेना है और दायें घुटने को मोड़ते हुए, शारीरिक सन्तुलन बनाये रखते हुए धीरे-धीरे नीचे आना है। दाहिने पैर के घुटने को जमीन पर रखना है। इस अन्तिम स्थिति में कुछ देर रूकना है। फिर धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाते हुए दायें घुटने को सीधा कर प्रारम्भिक स्थिति में आ जाना है। बायें पैर को सीधा कर जमीन पर रख लेना है। यह है वातायनासन। इसे महर्षि घेरण्ड ने वृक्षासन की संज्ञा दी है।

वृक्षासन

श्वास – प्रारम्भिक स्थिति में एक पैर पर खडे रहते हुए श्वास लें। शरीर को नीचे झुकाते एवं वापस ऊपर लाते समय श्वास रोके रहे। अन्तिम स्थिति में सामान्य श्वास लें। प्रारम्भिक स्थिति में वापस आकर श्वास छोडे़ं। शारीरिक सन्तुलन को बनाये रखने पर। ध्यान को अनाहत चक्र में केन्द्रित किया जाता है।

वृक्षासन से लाभ –

1. इस आसन का अभ्यास अन्तुल की प्राप्ति के लिए, पैरों की मांसपेशियों और उदर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है।
2. यह वृक्‍क एवं मूत्राशय की अतिक्रियाशीलता को कम करता है।
3. यह ब्रह्मचर्य का पालन के लिए वीर्य रक्षा को क्षमता विकसित करता है।

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अजितेश कुँवर, कुँवर योगा, देहरादून के संस्थापक हैं। भारत में एक लोकप्रिय योग संस्थान, हम उन उम्मीदवारों को योग प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करते हैं जो योग को करियर के रूप में लेना चाहते हैं। जो लोग योग सीखना चाहते हैं और जो इसे सिखाना चाहते हैं उनके लिए हमारे पास अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं। हमारे साथ काम करने वाले योग शिक्षकों के पास न केवल वर्षों का अनुभव है बल्कि उन्हें योग से संबंधित सभी पहलुओं का ज्ञान भी है। हम, कुँवर योग, विन्यास योग और हठ योग के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, हम योग के इच्छुक लोगों को इस तरह से प्रशिक्षित करना सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे दूसरों को योग सिखाने के लिए बेहतर पेशेवर बन सकें। हमारे शिक्षक बहुत विनम्र हैं, वे आपको योग विज्ञान से संबंधित ज्ञान देने के साथ-साथ इस प्राचीन भारतीय विज्ञान को सही तरीके से सीखने में मदद कर सकते हैं।

 

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About Kunwar Ajitesh

Mr. Ajitesh Kunwar Founder of Kunwar Yoga – he is registered RYT-500 Hour and E-RYT-200 Hour Yoga Teacher in Yoga Alliance USA. He have Completed also Yoga Diploma in Rishikesh, India.

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